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Wednesday, October 30, 2019

वो वक्त...

वो वक्त...

वो वक्त अब ना रहा

वो जमाना अब ना रहा

बस यादे रहे गयी

वो फसाना अब ना रहा

वो देखने को तरसना

वो मिलने को तडपना

अपनी हर एक साँसों पे

मेरा हक रखना

ठंड की वो शाम

तेरी गर्म सासों के नाम

वो कुछ भी ना रहा-२

बस यादें रहे गयी

वो फसाना ना रहा.

वो सिने पे सर रखके

धडकनों का सुनना

वो मुझसे लिपटके

लबों को चुमना

मेरी ऑंखो मे देखना

खुदको भुल जाना

वो कुछ भी ना रहा-२

बस यादे रहे गयी

वो फसाना अब ना रहा.



यादों के सहारे

जिया नही जाता

तेरा मुझसे बिछडना

सहा नही जाता

मै सब कुछ था

एक दिन तुम्हारे लिए

बस दोस्त रहे जाना

गँवारा नही होता

चलो वक्त बदल गया

ये भी बात सही है

वादों और सपनों का बोझ

उठाया नही जाता

तुम बदल गयी

(हाँ तुम बदल गयी)


तुम्हे बदलना ही था

वो भी सच था 

ये भी सच है

पर माना नहीं जाता


© copyright

डॉ. राहूल रजनी
patilrahulb14@gmail.com

Mob. No. 9623092113


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